Tuesday, April 5, 2011

दोस्तों बहुत दिनों के बाद एक अपने तरीके की कविता लाया हूँ!
बेहद स्वाभाविक अनुभूतियों की कविता है!
आप हरदम इसे महसूस करते होंगे!
फर्क इतना ही है...
"आप सोच रहे हैं...मैं लिख पा रहा हूँ..."

निवेदन करता हूँ....

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