Thursday, March 8, 2012

खेती-बाड़ी,चंचल नदियाँ
संपन्न गांव के चित्रण हैं
भारत के गांव में अब भी
बस भूख सुनाई देती है

सावन के झूले कहाँ दिखे?
गेहूं की बाली कहाँ दिखी?
पनघट पर गोरी नहीं दिखी!
गुमटी या मंडली कहाँ दिखी?

भादो आए,फगुआ आए
है कोई नहीं गाने वाला
अतृप्त आत्माओं की अब
बस हुक सुनाई देती है

भारत के गांव में अब भी
बस भूख सुनाई देती है

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