Sunday, September 25, 2011







कल तक बहुत हुलास था की
तुम वहाँ हो
यह सोच कर जीता था हरदम 
तुम वहाँ हो
और आसरा ही क्या था
जीने क़ा मेरे
कुछ साथ बीते पल
कुछ बोल तेरे
दिल था धड़कता सोचकर की
तुम वहाँ हो
तो क्या हुआ ग़र मैं यहाँ हूँ
तुम वहाँ हो



पर मैं ग़लत था,अब हूँ मैं
यह जान पाया
ठोकर लगी तब जाके मुझको
होश आया
अब बौखला के ढूंढता हूँ
तुम कहाँ को
चारों तरफ है जलजला पर
तुम कहाँ हो



न दूर तक हैं मेरी आखें 
देख पाती
हैं आंसुओं से पूर्ण
पलपल झिलमिलाती
जीवन क़ा मेरे अर्थ बोलो
तुम कहाँ हो
बस एक बार आवाज़ दे दो
तुम कहाँ हो



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