सुदर्शन! एक बार उतर आओ
के अब संहार ज़रूरी है
निर्माण करो,संहार करो
अब मानव क़ा आहार करो
अब क्रोध-प्रकम्पित धरती से
मानव क़ा निस्तार ज़रूरी है
सुदर्शन! एक बार उतर आओ
के अब संहार ज़रूरी है
अब कौन यहाँ भगीरथ है
जो गंगा लेकर आएगा?
औ' छिड़क-छिड़क कर गंगाजल
भवसागर पर लगाएगा
अब नहीं अन्य गति,श्मशान क़ा
अब विस्तार ज़रूरी है
सुदर्शन!एक बार उतर आओ
के अब संहार ज़रूरी है
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