Sunday, September 25, 2011

सुदर्शन! एक बार उतर आओ 
के अब संहार ज़रूरी है

निर्माण करो,संहार करो
अब मानव क़ा आहार करो
अब क्रोध-प्रकम्पित धरती से
मानव क़ा निस्तार ज़रूरी है

सुदर्शन! एक बार उतर आओ 
के अब संहार ज़रूरी है

अब कौन यहाँ भगीरथ है
जो गंगा लेकर आएगा?
औ' छिड़क-छिड़क कर गंगाजल
भवसागर पर लगाएगा
अब नहीं अन्य गति,श्मशान क़ा
अब विस्तार ज़रूरी है

सुदर्शन!एक बार उतर आओ
के अब संहार ज़रूरी है 

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