कल तक बहुत हुलास था की
तुम वहाँ हो
यह सोच कर जीता था हरदम
तुम वहाँ हो
और आसरा ही क्या था
जीने क़ा मेरे
कुछ साथ बीते पल
कुछ बोल तेरे
दिल था धड़कता सोचकर की
तुम वहाँ हो
तो क्या हुआ ग़र मैं यहाँ हूँ
तुम वहाँ हो
पर मैं ग़लत था,अब हूँ मैं
यह जान पाया
ठोकर लगी तब जाके मुझको
होश आया
अब बौखला के ढूंढता हूँ
तुम कहाँ को
चारों तरफ है जलजला पर
तुम कहाँ हो
न दूर तक हैं मेरी आखें
देख पाती
हैं आंसुओं से पूर्ण
पलपल झिलमिलाती
जीवन क़ा मेरे अर्थ बोलो
तुम कहाँ हो
बस एक बार आवाज़ दे दो
तुम कहाँ हो
aag se rista ..
ReplyDeletenaari se naata ,
kahe man samajh paya.....