जीवन जीने की जितनी उत्कंठा एक मरते आदमी में होती है...उतनी कभी एक आम आदमी में नहीं हो सकती...
जो प्यार हमे अपने जीवन में नहीं मिलता वो मरते समय ज़रूर मिलता है...हमारा कलात्मक पक्ष भी बेहद सुदृढ़ हो जाता है...
पर तब तक बहुत देर हो जाती है...दोस्तों मृत्यु से ही जीवन क़ा महत्व है...पर कहीं ऐसा तो नहीं की हमे जीवन को समझने के लिए मरना पड़ेगा...
जो प्यार हमे अपने जीवन में नहीं मिलता वो मरते समय ज़रूर मिलता है...हमारा कलात्मक पक्ष भी बेहद सुदृढ़ हो जाता है...
पर तब तक बहुत देर हो जाती है...दोस्तों मृत्यु से ही जीवन क़ा महत्व है...पर कहीं ऐसा तो नहीं की हमे जीवन को समझने के लिए मरना पड़ेगा...
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