तब शब्द नहीं मिल पाते थे,
जब भरा हुआ था भावों से,
अब रहा नहीं कुछ भी मन में,
शब्दों की गिनती क्या करना!
तब बोल नहीं आवश्यक थे,
आखें बातें कर लेती थीं,
मन मेरे कोई ठेस लगे,
तत्क्षण ही तेरा रो पड़ना!
था तुमने ही तो सिखलाया,
के "प्यार दीवाना होता है",
हम तो बस "प्यार के राही हैं",
जब"प्यार किया तो क्या डरना"
मत ऐसा तुम व्यव्हार करो,
मैं सांस भी न ले पाता हूँ,
गर इसको कहते जीवन हैं,
तो बतलाओ है क्या मरना?
तब याद करो तुम कहती थी,
कुछ होने न दूंगी तुमको,
"जब रोज़ की ये बीमारी है,
तो होगा ही जो है होना"
सब रस्में प्यार की ख़त्म हुईं,
जीवन से तेरे दूर चला,
न आऊंगा कुछ भी कहने,
कर ले जी चाहे जो करना!
तब मेरे लाए फूलों से,
तुम गालों को सहलाती थी,
गुलदान बना है घर अब तो,
औ' रहा भाग्य में नित झरना!
यह प्रेम कहानी ख़त्म हुई,
कल इसकी अंतिम झाँकी है,
उसकी चौखट पर "शहनाई"
मेरे घर वालों क़ा "रोना" !
जब भरा हुआ था भावों से,
अब रहा नहीं कुछ भी मन में,
शब्दों की गिनती क्या करना!
तब बोल नहीं आवश्यक थे,
आखें बातें कर लेती थीं,
मन मेरे कोई ठेस लगे,
तत्क्षण ही तेरा रो पड़ना!
था तुमने ही तो सिखलाया,
के "प्यार दीवाना होता है",
हम तो बस "प्यार के राही हैं",
जब"प्यार किया तो क्या डरना"
मत ऐसा तुम व्यव्हार करो,
मैं सांस भी न ले पाता हूँ,
गर इसको कहते जीवन हैं,
तो बतलाओ है क्या मरना?
तब याद करो तुम कहती थी,
कुछ होने न दूंगी तुमको,
"जब रोज़ की ये बीमारी है,
तो होगा ही जो है होना"
सब रस्में प्यार की ख़त्म हुईं,
जीवन से तेरे दूर चला,
न आऊंगा कुछ भी कहने,
कर ले जी चाहे जो करना!
तब मेरे लाए फूलों से,
तुम गालों को सहलाती थी,
गुलदान बना है घर अब तो,
औ' रहा भाग्य में नित झरना!
यह प्रेम कहानी ख़त्म हुई,
कल इसकी अंतिम झाँकी है,
उसकी चौखट पर "शहनाई"
मेरे घर वालों क़ा "रोना" !
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