दोस्तों...कुछ बातें हैं जो आपसे बाँटना चाहता हूँ | हिंदी की वर्तमान स्तिथि कितनी अच्छी है,सभी जानते हैं...और हिंदी कविताओं की हालत और भी सोचनीय है |
आजकल हिंदी कविताओं क़ा दौर फिर से लौटा है ..बहुत सारे लोग हैं जो जगह जगह जाकर कविता सुनते हैं...पर वास्तविकता यही है की हिंदी की कविता बस मनोरंजन की कविता बनकर रह गई है | हमें यह नहीं भूलना चाहिए की हर कविता किसी विशेष परिस्तिथि पर लिखी जाती है| और अगर कविता क़ा दर्द लोगों तक नहीं पहुंचे तो उसका मतलब ही क्या है!
आशा करता हूँ आगे से आप जब भी किसी कवि या लेखक को पढेंगे या सुनेंगे ...मेरी बात आपके ध्यान में रहेगी और हिंदी की गरिमा क़ा आप ख्याल रखेंगे....
आजकल हिंदी कविताओं क़ा दौर फिर से लौटा है ..बहुत सारे लोग हैं जो जगह जगह जाकर कविता सुनते हैं...पर वास्तविकता यही है की हिंदी की कविता बस मनोरंजन की कविता बनकर रह गई है | हमें यह नहीं भूलना चाहिए की हर कविता किसी विशेष परिस्तिथि पर लिखी जाती है| और अगर कविता क़ा दर्द लोगों तक नहीं पहुंचे तो उसका मतलब ही क्या है!
आशा करता हूँ आगे से आप जब भी किसी कवि या लेखक को पढेंगे या सुनेंगे ...मेरी बात आपके ध्यान में रहेगी और हिंदी की गरिमा क़ा आप ख्याल रखेंगे....
Bhaiya aapki baatein solaho aane satya hain....aaj ke yug me agar koi humaare umra ka chhatra koi kavita likhne ki koshish krta hai to uske saathi uska uphaas kr dete hain....uske hridaya ke marm me chhupe us dard ki bhavulkta ko nhi samajhte jo us chhatra ko aisi kavita likh kar apna dard kam krne ko vivash kr deta hai.Atah aapka yah prayaas ati saraahniya hai.......
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