"जीवन क़ा जितना अर्थ हमें ,
जीवन समझा न पाता है,
उससे ज्यादा तो मृत्यु क़ा,
आसार महज़ समझाता है"
"जब तक न ठोकर खाते हम,
तन कर चलते ही जाते हैं,
जब तक है होश नहीं आता,
बस वक़्त गुज़रता जाता है"
"इन अर्थहीन नग़मों से उन,
गीतों की तुलना क्या होगी,
जो सीने में इक छेद लिए,
कोई दीवाना गाता है"
"हम औरों के हित गाते हैं,
पर भले समझ न पाते हैं,
वो तो अपने ही गीतों पर,
टिप-टिप आंसू बरसाता है"
"मृत्यु की शक्ति क्या कहना,
जीवन तो इसकी दासी है,
कल शब्द न जिसको भाते थे,
वो आज गीत लिख जाता है "
"था दोनों हाथ पसारे वह,
पर मिलता था इक बूँद नहीं,
जब ख़त्म हुए गिनती के दिन,
लो प्रेम-सिन्धु लहराता है"
"कल तक तो ऐसा लगता था,
अभी सत्तर बरस बिताने हैं,
पर अब घंटे क्षण में बीतें,
दिन पल-भर में कट जाता है"
"क्या होगा उस बेचारी क़ा,
वो रो-रो के मर जाएगी,
क्यूँ किया प्यार उससे इतना,
वो सोच-सोच पछताता है"
"जो तेज़ समय से उड़ पाता,
जो बचपन को फिर जी पाता,
न करता प्यार कभी उससे,
नीरस यौवन को पी जाता"
"होनी की जो है प्रबल धार,
उस धार को मोड़ कहीं आता,
जो पथ ऐसे कल को लाता,
उस पथ को छोड़ कहीं आता"
"क्या मरता पंछी देखा है?
उड़ना क्या भूल कभी सकता?
आखों में रखता आसमान,
वह फिर-फिर पंख हिलाता है"